गंग नहर की वार्षिक बंदी के दौरान घाटों और नदी क्षेत्र की सफाई पर जोर, कुंभ 2027 से जुड़े रखरखाव कार्य भी चर्चा में।
हरिद्वार में गंगा घाटों की स्वच्छता को लेकर स्वयंसेवकों की ओर से अभियान चलाए जाने की खबर सामने आई है। 26 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, हरकी पैड़ी पर शांतिकुंज के 200 से अधिक स्वयंसेवकों ने गंगा स्वच्छता अभियान में भाग लिया। यह गतिविधि ऐसे समय हुई है जब गंग नहर की वार्षिक बंदी के दौरान रखरखाव और सफाई संबंधी कार्यों पर ध्यान दिया जा रहा है। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, नहर की बंदी में वार्षिक मरम्मत और कुंभ 2027 से जुड़े निर्माण कार्य शामिल हैं। बंदी के कारण हरकी पैड़ी सहित कुछ घाटों पर जलस्तर और गंगाजल की उपलब्धता प्रभावित होने की खबरें भी आई थीं। धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हरिद्वार में घाटों की स्वच्छता, नदी में कचरा न जाने देना और श्रद्धालुओं की सुविधा बनाए रखना प्रशासन तथा स्थानीय समुदाय की साझा जिम्मेदारी है।
गंगा स्वच्छता अभियान केवल घाटों पर दिखाई देने वाला कचरा हटाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। नदी में प्लास्टिक, पूजा सामग्री और अन्य अपशिष्ट जाने से रोकना भी महत्वपूर्ण है। श्रद्धालुओं को घाटों पर उपलब्ध कूड़ेदानों का उपयोग करना चाहिए और पूजा सामग्री के निस्तारण के लिए निर्धारित व्यवस्थाओं का पालन करना चाहिए। स्थानीय निकायों के लिए जरूरी है कि सफाई अभियान के बाद भी नियमित कचरा संग्रह, शौचालयों का रखरखाव और घाटों की निगरानी जारी रहे। नहर बंदी के दौरान मरम्मत कार्यों में सुरक्षा मानकों का पालन और जल प्रवाह की बहाली की समयसीमा स्पष्ट रखना भी जरूरी है। जल उपलब्धता में बदलाव के कारण श्रद्धालुओं को स्नान से जुड़ी स्थानीय सूचनाओं पर ध्यान देना चाहिए और जोखिम वाले स्थानों पर जाने से बचना चाहिए।
हरिद्वार में आने वाले श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए स्वच्छता, सुरक्षा और जल प्रबंधन एक-दूसरे से जुड़े हुए विषय हैं। आगामी कुंभ से पहले घाटों, रास्तों और संबंधित सुविधाओं का रखरखाव विशेष महत्व रखता है। स्वयंसेवी संगठनों की भागीदारी स्थानीय स्तर पर जागरूकता बढ़ा सकती है, लेकिन स्थायी परिणामों के लिए प्रशासनिक निगरानी और नागरिक सहयोग जरूरी है। नहर की बंदी कब समाप्त होगी, गंगाजल का सामान्य प्रवाह कब बहाल होगा और अलग-अलग घाटों पर क्या व्यवस्थाएं लागू रहेंगी, इनकी पुष्टि संबंधित विभाग की नवीनतम सूचना से की जानी चाहिए। गंगा की स्वच्छता बनाए रखने के लिए नियमित प्रयास और जिम्मेदार व्यवहार लंबे समय में अधिक प्रभावी साबित हो सकते हैं।
