सीएम धामी हुए नाराज: अफसरों ने जबरन बंद कीं 22 हजार शिकायतें, आंकड़ा देख हुए गुस्सा; अफसरों को दी ये चेतावनी

देवभूमि उत्तराखंड में अफसरों की लापरवाही पर मुख्यमंत्री धामी गुस्सा हो गए। दरअसल, अफसरों ने 22 हजार शिकायतें जबरन बंद कर दीं। सीएम ने कहा कि जिस अफसर ने जनता की शिकायत जबरन बंद की, उस पर कड़ी कार्रवाई होगी।

उत्तराखंड के अफसरों ने जनता की 22,246 शिकायतें जबरन बंद कर दीं। सीएम हेल्पलाइन 1905 की समीक्षा के दौरान जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने ये आंकड़ा आया तो वे नाराज हो गए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अगर किसी अफसर ने शिकायत को जबरन बंद किया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

कहा कि जिलाधिकारी, विभागाध्यक्ष या संबंधित सचिव की संस्तुति के बिना किसी भी स्तर पर शिकायतों को जबरन बंद करने की कार्रवाई न की जाए।
शुक्रवार को सचिवालय में सीएम धामी ने सीएम हेल्पलाइन 1905 की समीक्षा की।

उन्होंने कहा कि हेल्पलाइन केवल एक दूरभाष संख्या नहीं बल्कि जनता की अपेक्षाओं और विश्वास का महत्वपूर्ण माध्यम है। हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायत का निस्तारण शिकायतकर्ता की पूर्ण संतुष्टि सुनिश्चित होने तक किया जाए।

देहरादून में 6,084 शिकायतें शहरी विकास और 2,980 पेयजल विभाग से जुड़ी हैं। ऊधम सिंह नगर में राजस्व और खनन से जुड़ी शिकायतें सर्वाधिक हैं। हरिद्वार में खाद्य आपूर्ति और पुलिस विभाग से संबंधित शिकायतें सबसे अधिक है।

सीएम ने निर्देश दिए कि जिलाधिकारी स्तर पर हर सप्ताह और सचिव स्तर पर प्रत्येक माह में कम से कम दो बार शिकायतों की समीक्षा की जाए। कहा कि हेल्पलाइन की सफलता का वास्तविक आकलन तभी संभव है जब शिकायतकर्ता यह अनुभव करें कि सरकार ने उनकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए समयबद्ध समाधान प्रदान किया है।

सीएम ने सभी की सराहना की
सीएम ने अधिकतम शिकायतों का निस्तारण करने वाले अधिकारियों से फोन पर बात की। इनमें यूपीसीएल के उत्तरकाशी में तैनात अधिशासी अभियंता मनोज गुसाईं ने 99.09%, पौड़ी में अभिनव रावत ने 98.34%, ऋषिकेश के पूर्ति निरीक्षक सुनील देवली ने 98.30%, एडीओ विकासनगर दीपक थापली ने 98.23% और एसएचओ पटेलनगर विनोद गुसाईं ने 97.41% समाधान किया है। सीएम ने सभी की सराहना की।

जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक ने 2043 शिकायतें बंद कीं
राज्य में कुल 1,19,077 शिकायतों में से 22,246 शिकायतों (लगभग 18.68%) को अनुचित रूप से बंद कर दिया गया है। जानकारी के मुताबिक, विभाग अपनी जवाबदेही से बचने के लिए गंभीर शिकायतों को भी दूसरी श्रेणियों में बदल रहे हैं।

जल संस्थान के अफसरों ने पानी न आने की 861 शिकायतों को जबरन बंद कर दिया। सिलिंडर रिफिल और राशन कार्ड की मांग को शिकायतों के बजाए सिर्फ डिमांड मानकर छोड़ दिया। बिजली के अत्यधिक बिल और खराब मीटरों की समस्या को भी तकनीकी उलझनों में फंसा दिया।

जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक डीके सिंह के पास पेयजल संबंधी 2,074 शिकायतें थीं, जिनमें से उन्होंने 2043 (98.5 प्रतिशत) को बिना ठोस समाधान के जबरन बंद कर दिया। पर्यटन विकास अधिकारी ललित मोहन तिवारी ने 328 में से केवल 41 का निस्तारण किया।

6287 शिकायतें 180 दिनों से लंबित
साल 2021 से अब तक 6,287 शिकायतें ऐसी हैं जो 180 दिनों से अधिक समय से लंबित हैं। राजस्व विभाग (472), वन विभाग (445) और लोक निर्माण विभाग (401) इस सूची में सबसे ऊपर हैं। कुछ शिकायतें तो साल 2021 से प्रक्रिया में ही अटकी हुई हैं।

अक्तूबर-दिसंबर 2025 की तुलना में जनवरी-मार्च 2026 की तिमाही में लंबित शिकायतों में 107% की भारी बढ़ोतरी देखी गई है। वहीं, प्रक्रिया में वाली शिकायतों में 2290% का उछाल आया है।