उत्तराखंड में मौसम का बदला मिजाज, आठ जिलों में आंधी-बिजली का अलर्ट

देहरादून समेत गढ़वाल और कुमाऊं के कई जिलों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना; ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी के भी आसार।

उत्तराखंड में 29 अक्टूबर को मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्वानुमान के अनुसार, प्रदेश के कई पर्वतीय और मैदानी इलाकों में बादल छाने, हल्की से मध्यम बारिश होने तथा गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। देहरादून, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, चमोली, नैनीताल, चंपावत और पिथौरागढ़ में विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान में कुछ स्थानों पर हवा की गति 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे रहने और झोंकों के दौरान 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की आशंका व्यक्त की गई है। ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश के साथ बर्फबारी की संभावना भी जताई गई है। ऐसे में पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों, पर्यटकों और लंबी दूरी की यात्रा करने वाले वाहन चालकों को मौसम की ताजा जानकारी लेकर ही आगे बढ़ने की सलाह दी जाती है।

मौसम में बदलाव का असर सड़क यातायात, पर्यटन और रोजमर्रा की गतिविधियों पर पड़ सकता है। पर्वतीय सड़कों पर बारिश होने से फिसलन बढ़ सकती है, जबकि तेज हवाओं और आकाशीय बिजली के दौरान खुले स्थानों, पेड़ों तथा बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचना चाहिए। चारधाम क्षेत्रों और अधिक ऊंचाई वाले मार्गों पर जाने वाले यात्रियों को स्थानीय प्रशासन तथा मौसम विभाग की सलाह पर विशेष ध्यान देना चाहिए। जिन लोगों ने पहाड़ी इलाकों में घूमने की योजना बनाई है, उन्हें यात्रा शुरू करने से पहले सड़क की स्थिति, स्थानीय मौसम और आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता की जानकारी लेनी चाहिए। वाहन चलाते समय गति नियंत्रित रखना, पर्याप्त दूरी बनाए रखना और खराब दृश्यता के दौरान सावधानी बरतना भी जरूरी है। मौसम की चेतावनी को केवल सामान्य सूचना मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि पहाड़ों में स्थानीय परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं।

मौसम विभाग के उपलब्ध पूर्वानुमान के मुताबिक, 30 अक्टूबर को पिथौरागढ़, बागेश्वर, नैनीताल और चंपावत में कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना भी जताई गई है। ऊंचाई वाले इलाकों में संभावित बर्फबारी के कारण तापमान में गिरावट महसूस हो सकती है। किसानों को भी मौसम के अनुसार कृषि गतिविधियों की योजना बनानी चाहिए और खुले में रखी उपज को सुरक्षित रखना चाहिए। हालांकि, वास्तविक परिस्थितियां जिले और स्थान के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं, इसलिए स्थानीय प्रशासन और भारत मौसम विज्ञान विभाग के नवीनतम बुलेटिन को प्राथमिकता देना जरूरी है। फिलहाल यात्रियों और स्थानीय निवासियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि वे मौसम के अपडेट पर नजर रखें और अनावश्यक जोखिम से बचें।